रोजमर्रा की ये आदतें बढ़ा रही हैं डायबिटीज का खतरा, समय रहते बदल लें अपनी दिनचर्या

डायबिटीज यानी मधुमेह आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी दिनचर्या के बीच बड़ी संख्या में लोग ऐसी आदतों का हिस्सा बन चुके हैं, जो धीरे-धीरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती हैं। भारत में भी डायबिटीज के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। यही वजह है कि भारत को दुनिया में डायबिटीज के बड़े बोझ वाले देशों में गिना जाता है। चिंता की बात यह है कि अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवा और कामकाजी लोगों में भी ब्लड शुगर बढ़ने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। डायबिटीज होने पर शरीर में इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। जब इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

डायबिटीज का खतरा केवल ज्यादा मीठा खाने से ही नहीं बढ़ता। हमारी रोजमर्रा की कई ऐसी आदतें हैं, जिन्हें हम सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका असर शरीर पर पड़ सकता है। कम सोना, घंटों बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि से दूरी बनाना, लगातार तनाव में रहना, पर्याप्त पानी न पीना और खाने का समय बिगाड़ना ऐसी ही आदतों में शामिल हैं। सबसे पहले बात नींद की। आज बड़ी संख्या में लोग देर रात तक मोबाइल चलाने, काम करने या मनोरंजन में समय बिताने के कारण पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। लगातार कम सोने से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है और इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ने का खतरा रहता है। इसका सीधा असर ब्लड शुगर के नियंत्रण पर पड़ सकता है। इसलिए केवल नींद के घंटे ही नहीं, बल्कि रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत भी महत्वपूर्ण है।

इसी तरह घंटों एक ही जगह बैठे रहना भी शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहना, घर में लगातार टीवी देखना या मोबाइल चलाना और रोजाना व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना शारीरिक गतिविधि को काफी कम कर देता है। शरीर जितना कम सक्रिय रहेगा, ऊर्जा और ग्लूकोज का इस्तेमाल भी उतना प्रभावित हो सकता है। इसलिए दिनभर में थोड़ी-थोड़ी शारीरिक गतिविधि करते रहना जरूरी है। पैदल चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, हल्की कसरत करना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है।

तनाव भी ब्लड शुगर को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण वजहों में शामिल

तनाव भी ब्लड शुगर को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण वजहों में शामिल है। लगातार मानसिक दबाव में रहने पर शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन बढ़ सकते हैं। ये हार्मोन शरीर को तनाव की स्थिति से निपटने के लिए तैयार करते हैं और इस दौरान रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे तो ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पर्याप्त आराम, नियमित शारीरिक गतिविधि, योग, ध्यान और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। पानी कम पीने की आदत को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है और इससे रक्त में ग्लूकोज की सांद्रता बढ़ सकती है। खासकर जिन लोगों को पहले से ब्लड शुगर की समस्या है, उनके लिए पर्याप्त पानी पीना महत्वपूर्ण है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

खाने का समय बिगाड़ना भी लंबे समय में परेशानी पैदा कर सकता है। सुबह का नाश्ता लगातार छोड़ना, कई घंटे तक कुछ न खाना या रात में बहुत देर से भारी भोजन करना शरीर की दिनचर्या और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है। भोजन का समय नियमित रखना और संतुलित आहार लेना ज्यादा बेहतर है। खाने में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, प्रोटीन और फाइबर जैसे पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। साथ ही जरूरत से ज्यादा मीठे और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से दूरी रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज से बचाव के लिए किसी एक आदत को बदलना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पूरी जीवनशैली में संतुलन लाना जरूरी है। पर्याप्त नींद लेना, रोजाना सक्रिय रहना, तनाव को नियंत्रित करना, पर्याप्त पानी पीना और समय पर संतुलित भोजन करना ऐसी छोटी-छोटी आदतें हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डाल सकती हैं। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा है, जिनका वजन अधिक है या जिनमें पहले से ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या है, उन्हें नियमित जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही अगर ब्लड शुगर लगातार बढ़ा हुआ मिल रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय रहते जीवनशैली में सुधार और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सकीय उपचार अपनाकर डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। 

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