नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और उससे पैदा हो रही जाम की समस्या अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। धाम में दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत श्रद्धालुओं को कैंची धाम पहुंचने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना पड़ सकता है। प्रशासन मंदिर में रोजाना प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने कैंची धाम में बढ़ते दबाव और यातायात व्यवस्था को लेकर अधिकारियों तथा पर्यटन कारोबारियों के साथ बैठक की। बैठक में धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था और कैंची धाम के आसपास लगने वाले जाम को नियंत्रित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। आयुक्त ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की योजना के मुताबिक कैंची धाम में प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की सीमा निर्धारित की जा सकती है। इसका उद्देश्य किसी एक दिन अचानक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पैदा होने वाली अव्यवस्था को रोकना है। ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए पहले से यह तय किया जा सकेगा कि किस दिन कितने श्रद्धालु धाम में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चारधाम यात्रा की तर्ज पर कैंची धाम के लिए भी एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा सकता है। श्रद्धालु पोर्टल और संबंधित मोबाइल एप के माध्यम से घर बैठे अपना पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद निर्धारित तिथि के अनुसार श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचेंगे। इससे प्रशासन को भीड़ का अनुमान पहले से मिल सकेगा और उसी के अनुरूप पुलिस, यातायात तथा अन्य व्यवस्थाएं की जा सकेंगी।
कैंची धाम मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार बनाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। फिलहाल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक ही क्षेत्र में जमा होने से भीड़ का दबाव बढ़ जाता है। प्रवेश और निकास के रास्ते अलग होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा। इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस और प्रशासन को मदद मिलेगी। कैंची धाम की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ कैंची धाम अब पर्यटन के लिहाज से भी उत्तराखंड के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो चुका है। विशेष रूप से युवाओं और देश के दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। इसी वजह से सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या अचानक कई गुना बढ़ जाती है। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद भी कैंची धाम की चर्चा और लोगों की दिलचस्पी बढ़ने की बात सामने आई है। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग धाम पहुंच रहे हैं। हाल के दिनों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा असर कैंची धाम और आसपास की सड़क व्यवस्था पर दिखाई दिया है। कई मौकों पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ा।
कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा
कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है। बड़ी संख्या में निजी वाहन कैंची धाम की ओर पहुंचते हैं, जबकि सड़क की क्षमता सीमित होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। इसका असर केवल धाम आने वाले श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और दूसरे पर्यटकों पर भी पड़ता है। प्रशासन का मानना है कि केवल यातायात पुलिस की तैनाती बढ़ाकर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित और व्यवस्थित करना जरूरी है। प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था इसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अगर प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले से निर्धारित होगी तो प्रशासन भी उसी हिसाब से यातायात और सुरक्षा की योजना तैयार कर सकेगा।
ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को निर्धारित तिथि और उपलब्ध संख्या के आधार पर दर्शन की अनुमति देने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इससे अचानक उमड़ने वाली भीड़ पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। साथ ही श्रद्धालुओं को भी पहले से पता होगा कि किस दिन और किस समय उन्हें धाम पहुंचना है। प्रशासन की ओर से शासन को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में पंजीकरण प्रक्रिया, श्रद्धालुओं की दैनिक सीमा, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े अन्य पहलुओं को शामिल किया जाएगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप विकसित करने की दिशा में आगे काम किया जा सकेगा।
कैंची धाम के बढ़ते महत्व को देखते हुए आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की है। श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिले, स्थानीय लोगों को जाम से राहत मिले और पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित न हों, इसके लिए भीड़ प्रबंधन की ठोस व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है। प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने के बाद कैंची धाम में आने वाली भीड़ को पहले से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। रोजाना 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संभावित सीमा, अलग प्रवेश-निकास द्वार और ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था मिलकर धाम में भीड़ प्रबंधन का नया मॉडल तैयार कर सकती है। अब सबकी नजर शासन को भेजे जाने वाले प्रस्ताव और उस पर होने वाले निर्णय पर है।

