आज से सावन मास की हुई शुरुआत, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय, इस बार पड़ेंगे चार सोमवार

सावन मास की शुरुआत आज गुरुवार, 30 जुलाई से हो गई है। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र महीना 28 अगस्त तक चलेगा। सावन के आगमन के साथ ही देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया है। देवभूमि उत्तराखंड में भी श्रद्धा और आस्था का अनूठा वातावरण देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से हरिद्वार में कांवड़ मेले की शुरुआत के साथ धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और “हर-हर महादेव” तथा “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया है। हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। 

स्कंद पुराण में भी श्रावण मास के महत्व का वर्णन मिलता है, जिसमें कहा गया है कि इस दौरान स्नान, दान, जप और तप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के दुखों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष सावन मास में चार सोमवार पड़ रहे हैं। ये सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को आएंगे। सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष माध्यम माना जाता है। अविवाहित युवतियां योग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं। शिव मंदिरों में इन दिनों विशेष पूजा और रुद्राभिषेक के आयोजन किए जाएंगे।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार सावन का महीना आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान नियमित पूजा-पाठ, महामृत्युंजय मंत्र और शिव मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव आराधना से वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।पंचांग के अनुसार सावन महीने में दो ग्रहण भी पड़ेंगे। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए यहां इनके सूतक काल को मान्य नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद ज्योतिषाचार्य ग्रहण के समय धार्मिक साधना और मंत्र जाप को लाभकारी बताते हैं।

हरिद्वार में देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त आते हैं कांवड़ लेने

सावन मास के साथ ही हरिद्वार में कांवड़ मेले का रंग चढ़ने लगा है। देश के विभिन्न राज्यों से लाखों शिवभक्त हरिद्वार पहुंच रहे हैं और गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकल रहे हैं। हर की पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। हरिद्वार पुलिस ने श्रद्धालुओं और आम नागरिकों से अपील की है कि कांवड़ मेले के दौरान घर से निकलने से पहले ट्रैफिक प्लान की जानकारी अवश्य लें, निर्धारित मार्गों का पालन करें और पुलिस प्रशासन का सहयोग करें, ताकि मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। 

देवभूमि उत्तराखंड में सावन की शुरुआत के साथ ही मंदिरों, आश्रमों और गंगा घाटों पर भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा है। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा और शिवभक्ति के उत्साह ने पूरे प्रदेश को धार्मिक रंग में रंग दिया है। आने वाले एक महीने तक शिव आराधना, व्रत, पूजा और धार्मिक आयोजनों के बीच श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

सावन माह केवल शिवभक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों का भी महीना है। इस दौरान कामिका एकादशी, सावन शिवरात्रि, हरियाली अमावस्या, हरियाली तीज, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। 

इन त्योहारों को लेकर मंदिरों और बाजारों में अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं। सावन माह के दौरान प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस वर्ष 4, 11, 18 और 25 अगस्त को यह व्रत होगा। मान्यता है कि मां गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में समृद्धि आती है। उत्तराखंड के विभिन्न देवी मंदिरों में भी इन दिनों विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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