करीब दो वर्षों से देश से दूर भारत में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भविष्य को लेकर बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि गिरफ्तारी, जेल या यहां तक कि मौत की सजा का खतरा होने के बावजूद वह इस वर्ष के अंत तक अपने देश बांग्लादेश लौटने के लिए तैयार हैं। निर्वासन के दौरान भारत में रह रहीं हसीना ने कहा कि उन्हें अपने लोगों की पुकार सुनाई दे रही है और वह हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से नई दिल्ली में रह रही शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी को ई-मेल के माध्यम से दिए जवाब में कहा कि उन्हें अपने भविष्य का अंदाजा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह लौटती हैं तो उनके साथ कुछ भी हो सकता है, फिर भी वह अपने लोगों के बीच रहना चाहती हैं।
हसीना ने कहा, “मेरी हत्या हो सकती है। मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। मुझे जेल भेजा जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद मैं अपने देश लौटना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं। मुझे अपनी किस्मत का पूरा एहसास है, फिर भी मैं अपने देश वापस जाने का फैसला कर चुकी हूं।” पूर्व प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति अभी भी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। देश में सत्ता परिवर्तन के बाद उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज किए जा चुके हैं और उन्हें अदालतों में पेश होने के लिए कहा गया है। इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह कानूनी लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं। इससे पहले भी शेख हसीना कह चुकी हैं कि वह और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेता एक दिन अपने देश लौटेंगे और अदालतों का सामना करेंगे। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वह कानून के तहत अपना पक्ष रखने को तैयार हैं। एक अन्य साक्षात्कार में हसीना ने कहा था कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भारी दमन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद अवामी लीग से जुड़े हजारों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हसीना ने कहा कि यदि उन्हें मौत भी स्वीकार करनी पड़े तो वह अपने देश की मिट्टी पर ही होनी चाहिए।
उन्होंने भावुक स्वर में कहा था कि वह उसी भूमि पर अंतिम सांस लेना चाहती हैं जहां उनके माता-पिता दफन हैं और जहां उनके परिवार ने संघर्ष और बलिदान की लंबी विरासत छोड़ी है। उनके इस बयान को उनके समर्थक देश वापसी के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं। शेख हसीना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शुरुआत 2024 में उस समय हुई जब बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन ने देशव्यापी राजनीतिक संकट का रूप ले लिया। शुरुआत में यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण और कोटा प्रणाली के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह सरकार विरोधी अभियान में बदल गया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया। कई महीनों तक चले इन आंदोलनों के दौरान हिंसा, झड़पों और गिरफ्तारियों की घटनाएं सामने आईं। हजारों लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के आरोप लगाए थे।
आंदोलन, सत्ता परिवर्तन और अब शेख हसीना की देश वापसी की तैयारी
लगातार बढ़ते दबाव और राजनीतिक संकट के बीच अगस्त 2024 में शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश छोड़ दिया और भारत आ गईं। उनके देश छोड़ने के साथ ही बांग्लादेश में उनके लगभग 15 वर्षों से अधिक लंबे शासन का अंत हो गया। हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई। नई सरकार के गठन के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री और उनके कई करीबी सहयोगियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर कई मामलों की सुनवाई शुरू की।
इन्हीं मामलों में शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े आरोप लगाए गए। ट्रिब्यूनल ने उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि हसीना और उनकी पार्टी लगातार इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही है। यदि शेख हसीना वास्तव में दिसंबर तक बांग्लादेश लौटती हैं तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक हो सकती है। उनकी वापसी न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल शेख हसीना का संदेश स्पष्ट है। तमाम कानूनी चुनौतियों, गिरफ्तारी के खतरे और मौत की सजा की आशंकाओं के बावजूद वह अपने देश लौटने का मन बना चुकी हैं। उनका कहना है कि जब उनका देश और उनके समर्थक उन्हें पुकार रहे हैं तो वह हमेशा के लिए दूर नहीं रह सकतीं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वर्ष के अंत तक शेख हसीना वास्तव में बांग्लादेश लौटती हैं और लौटने के बाद वहां की अदालतों और राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किस तरह करती हैं।

