उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी समेत छह प्रमुख नदियां खतरे के स्तर के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं, जिससे नदी किनारे बसे क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी तटों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है। बारिश के कारण हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। कई घाट पानी में डूब गए हैं और नदी किनारे स्थित कुछ मंदिरों तक पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने घाटों पर आवाजाही सीमित कर दी है और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को नदी में स्नान न करने की सलाह दी गई है।
देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी को देखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। कई क्षेत्रों में जलभराव और सड़क बाधित होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था, इसलिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्या भूस्खलन की वजह से उत्पन्न हुई है। लगातार बारिश से पहाड़ियां कमजोर हो गई हैं और कई स्थानों पर मलबा सड़कों पर आ गया है।
राज्यभर में 132 सड़कें बंद होने की सूचना है, जिनमें कई महत्वपूर्ण ग्रामीण और जिला मार्ग शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन की टीमें मार्ग खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। चारधाम यात्रा भी मौसम की मार से प्रभावित हुई है। बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर मलबा और पत्थर आने से यातायात रोकना पड़ा है। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है और मार्ग खुलने के बाद ही आगे भेजा जा रहा है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की है।
भूस्खलन और बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता, आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर
मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके चलते आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नदी किनारे बसे गांवों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। कई जगहों पर पहाड़ियों से पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने चेतावनी जारी कर लोगों को नदी के करीब जाने से बचने की सलाह दी है। घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस तथा आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बंद सड़कों को खोलने के लिए मशीनें लगाई गई हैं, जबकि बिजली और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर उत्तराखंड में मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाले खतरों को उजागर कर दिया है और प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा दी है।

