दिल्ली सरकार में दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। सरकार का आरोप है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद विभाग की ओर से लंबित खरीद प्रक्रियाओं पर विस्तृत कार्ययोजना और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित हुए हैं। सरकार के अनुसार, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में देरी का सीधा असर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। ऐसे में मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया है। बताया गया है कि विभाग को खरीद प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई दी।
नोटिस में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग को तीन अलग-अलग अवसरों पर लंबित खरीद प्रक्रियाओं की स्थिति, कार्ययोजना और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद निर्धारित समय में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। सरकार का मानना है कि इस तरह की देरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकती है।
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया के तहत आगे और अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 26 मई को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सभी लंबित खरीद प्रक्रियाओं के लिए विस्तृत और बिंदुवार कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया था। इस योजना में दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद पूरी करने की समयसीमा तय करना शामिल था। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरी और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से आवश्यक मांग प्राप्त करने और उनकी समीक्षा के लिए भी स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने को कहा गया था। सरकार चाहती थी कि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए ताकि मरीजों को आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए।
तीन बार निर्देश के बावजूद नहीं सौंपी गई रिपोर्ट
सरकार का आरोप है कि प्रारंभिक निर्देश जारी होने के बाद भी विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने नोटिस में उल्लेख किया है कि तीन बार निर्देश देने के बावजूद लंबित खरीद प्रक्रियाओं पर विस्तृत कार्ययोजना और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी को आधार बनाते हुए प्रमुख सचिव से पूछा गया है कि आखिर निर्धारित समय में रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी गई और निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। सरकार ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है।
दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में देरी का प्रभाव सीधे अस्पतालों की सेवाओं पर पड़ सकता है। यदि समय पर खरीद नहीं होती है तो आवश्यक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और मरीजों को उपचार में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण सरकार इस मामले को केवल वित्तीय अनियमितता के रूप में नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मान रही है।
सरकार का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रमुख सचिव को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दिल्ली सरकार अब खरीद प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और देरी के मामलों में सीधे जवाबदेही तय करना चाहती है। दिल्ली सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्ध कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मामले में प्रमुख सचिव के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

