केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल्स की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि अग्निपथ योजना के तहत प्रशिक्षित जवानों के अनुभव और कौशल का लाभ देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मिलेगा। इसी उद्देश्य से भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए पूर्व अग्निवीरों के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है, जिसके तहत उन्हें आरक्षण के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण रियायतें भी दी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे अग्निवीरों के लिए सैन्य सेवा के बाद रोजगार की राह आसान होगी और सुरक्षा बलों को पहले से प्रशिक्षित एवं अनुशासित जवान मिल सकेंगे।
मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) तथा राइफलमैन के पदों पर भर्ती के लिए ‘पूर्व अग्निवीर’ नाम से एक नई श्रेणी बनाई है। इस श्रेणी के तहत इन पदों की कुल रिक्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। नित्यानंद राय ने बताया कि यह फैसला अग्निपथ योजना के तहत सेवा देने वाले युवाओं के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार चाहती है कि सेना में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवाओं का अनुभव और दक्षता देश की अन्य सुरक्षा एजेंसियों में भी उपयोग हो।
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा को लेकर विशेष राहत दी जाएगी। सामान्य उम्मीदवारों की तुलना में उन्हें अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। वहीं अग्निपथ योजना के पहले बैच के उम्मीदवारों के लिए पांच वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट का प्रावधान किया गया है, ताकि वे बिना किसी नुकसान के इन भर्तियों में भाग ले सकें। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को भी पूर्व अग्निवीरों के लिए सरल बनाया है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि इन उम्मीदवारों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (पीएसटी), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (पीईटी) और लिखित परीक्षा से छूट दी जाएगी। चूंकि ये सभी युवा पहले ही भारतीय सेना में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा वही प्रक्रियाएं पूरी करने की आवश्यकता नहीं होगी।
गृह मंत्रालय का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल भर्ती प्रक्रिया को तेज बनाएगी बल्कि सुरक्षा बलों को पहले से प्रशिक्षित और अनुशासित जवान भी उपलब्ध कराएगी। इससे प्रशिक्षण पर लगने वाला समय और संसाधन भी कम होंगे। नित्यानंद राय ने लोकसभा में यह भी बताया कि पूर्व अग्निवीरों के भविष्य और उनकी नियुक्तियों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेष ‘पूर्व अग्निवीर विंग’ का गठन किया गया है। यह विंग विभिन्न सुरक्षा बलों में उनकी भर्ती, समन्वय और अन्य प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीरों का चार वर्ष का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन सरकार ने पहले से ही उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू कर दी है, ताकि सेवा समाप्त होने के बाद उन्हें रोजगार के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
दिसंबर 2025 में बदले गए भर्ती नियम, 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया आरक्षण
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि इस फैसले को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में भर्ती नियमों में संशोधन किया था। इसके तहत ‘बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, जनरल ड्यूटी कैडर (नॉन-गजेटेड) भर्ती नियम, 2015’ में बदलाव किया गया। पहले इन पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर अब 50 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह बदलाव अग्निपथ योजना को और अधिक प्रभावी बनाएगा। योजना शुरू होने के समय से ही युवाओं के भविष्य और चार वर्ष की सेवा के बाद रोजगार को लेकर कई सवाल उठाए जाते रहे हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार लगातार विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों में पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। सीएपीएफ और असम राइफल्स जैसे सुरक्षा बलों में बड़ी संख्या में पूर्व अग्निवीरों की भर्ती होने से बलों की कार्यक्षमता भी मजबूत होगी। ये जवान पहले से सैन्य प्रशिक्षण, हथियार संचालन, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव रखते हैं, जिससे उन्हें अलग से लंबा प्रशिक्षण देने की आवश्यकता कम पड़ेगी। सरकार पहले भी कई सार्वजनिक उपक्रमों, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र से पूर्व अग्निवीरों को रोजगार देने की अपील कर चुकी है।
कई राज्यों ने पुलिस भर्ती में भी पूर्व अग्निवीरों को आयु सीमा और आरक्षण जैसी सुविधाएं देने की घोषणा की है।केंद्र सरकार का कहना है कि अग्निपथ योजना केवल चार वर्ष की सैन्य सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रशिक्षित, अनुशासित और कुशल युवाओं को भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। सीएपीएफ और असम राइफल्स में 50 प्रतिशत आरक्षण का यह फैसला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और व्यापक कदम माना जा रहा है।

