लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मंगलवार शाम प्रधानमंत्री आवास के निकट धरना प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रुख और अधिक आक्रामक कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े मुद्दे, छात्रों के कथित उत्पीड़न और सरकार की जवाबदेही की मांग को लेकर उसका आंदोलन संसद से लेकर सड़क तक जारी रहेगा। दूसरी ओर संसद का मानसून सत्र भी लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है, जहां विपक्ष सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। मंगलवार को राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के पास धरना दिया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने देर शाम राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया था। हालांकि सभी नेताओं को रात करीब साढ़े नौ बजे रिहा कर दिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने डिटेंशन सेंटर से वीडियो संदेश जारी कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष केवल इतना चाहता है कि संसद में नीट और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए ताकि सभी पक्ष अपनी बात रख सकें। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। राहुल गांधी ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमे वापस लिए जाएं और प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि देशभर में लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंतित हैं और ऐसे समय में सरकार को जवाब देना चाहिए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि नीट से जुड़े विवाद ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है और सरकार इस मुद्दे पर गंभीर बहस से बच रही है। धरने की पूरी रणनीति कांग्रेस ने बेहद गोपनीय रखी थी। पार्टी नेताओं के अनुसार मंगलवार दोपहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 84वें जन्मदिन के बहाने उनके राजाजी मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे थे। सुरक्षा एजेंसियों को भी यही लगा कि नेता केवल जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचे हैं। इसके बाद सभी नेता अचानक पैदल प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ गए और वहां धरने पर बैठ गए। चूंकि खड़गे का आवास प्रधानमंत्री आवास से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को तैयारी का अधिक समय नहीं मिल पाया।
धरना स्थल पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं से बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करने का आग्रह भी किया, लेकिन विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में लेकर धरना समाप्त कराया। सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में किसी भी विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन कांग्रेस ने संवाद के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन का रास्ता चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर आम लोगों को असुविधा पहुंचाई गई और छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
मानसून सत्र में विपक्ष का आरोप- मोदी सरकार गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही
राहुल गांधी की हिरासत के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई देने लगी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि नीट, छात्रों पर दर्ज मुकदमों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर संसद में व्यापक चर्चा कराए बिना वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि वह नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। पहले दो दिनों में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष के शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
मंगलवार को भी कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते पहले सदन को दोपहर तक स्थगित किया गया और बाद में पूरे दिन के लिए कार्यवाही रोकनी पड़ी। राहुल गांधी ने प्रदर्शन से एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर नीट सहित विभिन्न मुद्दों पर सदन में चर्चा कराने की मांग भी रखी थी। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में संसद ही सबसे बड़ा मंच है और सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए। वहीं भाजपा का आरोप है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही बाधित कर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है।
राहुल गांधी की हिरासत के बाद कांग्रेस इस मुद्दे को और अधिक मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे पर राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तथा लगातार हंगामे की संभावना बनी हुई है। नीट विवाद, छात्रों के अधिकार और संसद में चर्चा की मांग अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह मानसून सत्र के सबसे बड़े टकराव का केंद्र बनता जा रहा है।

