ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जीवन बचाने की नई पहल, जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी दोपहिया एम्बुलेंस, केंद्र सरकार ने शुरू की तैयारी 

देश के दूरदराज, ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। कई बार खराब सड़क संपर्क, संकरी गलियां, पहाड़ी रास्ते और यातायात बाधाएं मरीजों तक एम्बुलेंस के पहुंचने में देरी का कारण बनती हैं, जिससे गंभीर परिस्थितियों में लोगों की जान तक चली जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार अब दोपहिया सड़क एम्बुलेंस की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।

केंद्र सरकार का मानना है कि दोपहिया सड़क एम्बुलेंस आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी और तेज बना सकती हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां सामान्य चारपहिया एम्बुलेंस का पहुंचना मुश्किल होता है, वहां यह व्यवस्था मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है। पहाड़ी राज्यों, ग्रामीण इलाकों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों और संकरी सड़कों वाले स्थानों में इन एम्बुलेंसों का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्तमान में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अंतर्गत दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को अलग वाहन श्रेणी के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। यही कारण है कि इनके निर्माण, सुरक्षा मानकों, पंजीकरण, संचालन, फिटनेस जांच और रोगी परिवहन प्रणाली को लेकर कोई राष्ट्रीय स्तर का स्पष्ट ढांचा मौजूद नहीं है। सरकार प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से इस कमी को दूर करना चाहती है। मंत्रालय ने एआईएस-209 (भाग-1) नामक मानक को अपनाने का प्रस्ताव रखा है। यह मानक जीवन रक्षक दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के निर्माण, उपकरणों और कार्यात्मक सुरक्षा से संबंधित आवश्यकताओं को निर्धारित करता है। इसके लागू होने के बाद देशभर में दोपहिया एम्बुलेंसों के लिए एक समान नियम और मानक तय हो जाएंगे।

प्रस्ताव के अनुसार 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद निर्मित एल-2 श्रेणी की सभी दोपहिया सड़क एम्बुलेंसों के लिए एआईएस-209 (भाग-1): 2026 का अनुपालन अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ऐसे वाहन सुरक्षा और कार्यक्षमता के निर्धारित मानकों पर खरे उतरें। मंत्रालय ने दोपहिया एम्बुलेंस पर लगाई जाने वाली आपातकालीन चेतावनी शीर्ष बत्तियों के लिए भी मानक तय करने का प्रस्ताव दिया है। 1 अक्टूबर 2027 से इन वाहनों में उपयोग होने वाली चेतावनी लाइटों को भी निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना होगा। इससे सड़क पर अन्य वाहन चालकों को एम्बुलेंस की पहचान आसानी से हो सकेगी और आपातकालीन स्थिति में उसे प्राथमिकता मिल सकेगी।

प्रस्तावित नियमों के तहत ऐसी एम्बुलेंसों का संचालन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित क्षेत्रों में किया जाएगा। राज्य सरकारें अपने भौगोलिक और स्थानीय जरूरतों के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान कर सकेंगी जहां दोपहिया एम्बुलेंस सबसे अधिक उपयोगी साबित हो सकती हैं। इससे राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने की सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने इन वाहनों को परिवहन वाहन की श्रेणी में रखने का भी प्रस्ताव दिया है। इसके तहत दोपहिया सड़क एम्बुलेंसों के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा और उसका नवीनीकरण प्रत्येक दो वर्ष में कराना पड़ेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वाहन लगातार सुरक्षित और उपयोग योग्य स्थिति में बने रहें।

सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर, हर दो साल में होगी फिटनेस जांच

मसौदा नियमों में फिटनेस निरीक्षण के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि एम्बुलेंस में लगी रोगी-परिवहन इकाई और सहायक उपकरण सुरक्षित रूप से स्थापित हैं या नहीं। इसके अलावा टायर और रिम की स्थिति, आपातकालीन चेतावनी लाइटें, स्ट्रेचर की मजबूती, लॉकिंग सिस्टम, रोगी सुरक्षा उपकरण, लोडिंग और अनलोडिंग व्यवस्था तथा अग्निशामक यंत्र की उपलब्धता और वैधता की भी जांच की जाएगी। एआईएस-209 (भाग-1) मानक दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को एल-2 श्रेणी के ऐसे वाहन के रूप में परिभाषित करता है जिसमें एम्बुलेंस सहायक इकाई या रोगी परिवहन प्रणाली लगी हो। इस मानक के तहत वाहन की संरचना, सुरक्षा और संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

इनमें वाहन की स्थिरता, ब्रेकिंग क्षमता, पार्किंग ब्रेक की प्रभावशीलता, ढलान वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता, पीछे की दृश्यता और वाहन के विभिन्न हिस्सों की मजबूती जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा रोगी को सुरक्षित तरीके से वाहन में लाने और ले जाने, उसे यात्रा के दौरान सुरक्षित रखने तथा मौसम और अन्य बाहरी जोखिमों से बचाने के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। दोपहिया सड़क एम्बुलेंस व्यवस्था भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे सकती है। कई बार दुर्घटना, हृदयाघात, प्रसव या अन्य गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि चिकित्सा सहायता जल्दी पहुंच जाए तो मरीज की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और संकरी गलियों वाले शहरी इलाकों में यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है। जहां बड़ी एम्बुलेंसों को पहुंचने में समय लगता है, वहां दोपहिया एम्बुलेंस तेजी से मौके पर पहुंचकर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा सकेगी और जरूरत पड़ने पर मरीज को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद करेगी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि प्रस्तावित नियम दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के निर्माण और संचालन में सुरक्षा, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे। इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और उन क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सहायता पहुंच सकेगी जहां अब तक पहुंचना कठिन माना जाता रहा है।

मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना जारी होने की तारीख से 30 दिनों तक प्राप्त टिप्पणियों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आवश्यक संशोधन कर केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो आने वाले वर्षों में देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

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