हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून लगातार तबाही मचा रहा है। भारी बारिश, भूस्खलन, सड़क दुर्घटनाओं और नदी-नालों के उफान के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में मानसून से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम की मार के बीच कई जिलों में सड़क संपर्क बाधित है, पुल क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और सरकारी भवनों को भी नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन लगातार लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा। किन्नौर जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया। राष्ट्रीय राजमार्ग-5 के समीप एक कार अनियंत्रित होकर सतलुज नदी में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि लगातार बारिश के कारण सड़क पर फिसलन बढ़ गई थी, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका।
इसी दिन कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र में भी एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। यहां एक वाहन करीब 20 फीट गहरी खाई में गिर गया। दुर्घटना में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि अन्य लोगों को गंभीर चोटें आईं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि खराब मौसम और फिसलन भरी सड़कें हादसे की वजह बनीं। राज्य में लगातार हो रही बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाओं में भी तेजी आई है। कई स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण सड़कें बंद हो गई हैं। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की टीमें सड़कों को बहाल करने में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 109 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। सतलुज, ब्यास और रावी जैसी प्रमुख नदियों में पानी का बहाव सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर छोटे पुल और संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के आसपास न जाने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। पर्यटक स्थलों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण एक सरकारी स्कूल भवन का हिस्सा ढह गया। हालांकि घटना के समय भवन में कोई छात्र मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने भवन की स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है और आसपास के अन्य पुराने भवनों की भी जांच कराई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश से कमजोर हो चुकी संरचनाओं को खतरा बढ़ गया है।
भूस्खलन, ढहे पुल और बढ़ती चुनौतियों के बीच अलर्ट पर प्रशासन
सिरमौर जिले में शनिवार को 52 वर्ष पुराना एक पुल अचानक ढह गया। पुल के टूटने से आसपास के कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था शुरू कर दी है, जबकि तकनीकी विशेषज्ञ पुल गिरने के कारणों की जांच कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगातार बारिश और तेज जलप्रवाह के कारण पुल की नींव कमजोर हो गई थी।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासनों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पर्यटन स्थलों पर भी प्रशासन विशेष सावधानी बरत रहा है। मनाली, शिमला, किन्नौर और कुल्लू जैसे क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है। कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और नदी किनारे जाने पर रोक लगाई गई है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
पहाड़ी राज्यों में अनियोजित निर्माण, सड़कों का अत्यधिक विस्तार और पर्यावरणीय असंतुलन भी आपदाओं की तीव्रता बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैं। लगातार हो रही बारिश से पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में दीर्घकालिक योजना और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
फिलहाल हिमाचल प्रदेश में मानसून का दौर जारी है और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन खराब मौसम के बीच लोगों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। लगातार बढ़ रहे हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में भी सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी।

