जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा और भावनात्मक संदेश दिया है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को “भटके हुए बच्चे” बताते हुए कहा कि उन्हें दंडित करने या कानूनी कार्रवाई में उलझाने के बजाय सही मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है, लेकिन इसके बावजूद युवाओं को सुधार और संवाद का अवसर मिलना चाहिए। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस घटना ने समाज के एक बड़े वर्ग को आहत किया है और लोगों में स्वाभाविक रूप से नाराजगी भी है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जब युवा छात्र-छात्राओं द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग किया जाता है तो समाज में चिंता और आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है। इसके बावजूद उन्होंने लोगों से संयम बरतने और बदले की भावना से दूर रहने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि मर्यादा और शालीनता की सीमाओं को पार कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, तर्क और विचारों का सम्मान होना चाहिए। यदि युवा भावनाओं में बहकर गलत रास्ता चुन लेते हैं तो समाज और परिवार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें सही दिशा दिखाई जाए। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि जब कभी हमारी जीभ गलती से दांतों के बीच आ जाती है और कट जाती है, तब हम अपने दांत नहीं तोड़ते। ऐसा इसलिए क्योंकि जीभ भी हमारी होती है और दांत भी हमारे ही होते हैं। उन्होंने कहा कि यही स्थिति इन बच्चों की भी है। वे हमारे समाज का हिस्सा हैं, हमारे अपने बच्चे हैं। यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसका समाधान प्रतिशोध नहीं, बल्कि मार्गदर्शन और सुधार होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को अदालतों के चक्कर कटवाने, सामाजिक रूप से अलग-थलग करने या उन्हें लगातार कठघरे में खड़ा करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। इसके बजाय आवश्यक है कि उन्हें यह समझाया जाए कि लोकतांत्रिक विरोध और व्यक्तिगत अपमान के बीच क्या अंतर होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और देश को उनकी ऊर्जा तथा प्रतिभा की आवश्यकता है।
उन्होंने छात्रों से भी सीधे संवाद करते हुए कहा कि जीवन में गलतियां होना असामान्य नहीं है, लेकिन उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही परिपक्वता की पहचान है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे इस विवाद को पीछे छोड़कर शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अपनी ऊर्जा लगाएं। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज दोनों ही युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और देश के विकास में उनकी भागीदारी सबसे बड़ी ताकत है।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद, जांच जारी
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। वीडियो में एक महिला प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठी। इसी क्रम में 29 जुलाई को नोएडा में एक शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां की गईं, जिससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। चूंकि यह घटना दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में हुई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। शुक्रवार को यह जीरो एफआईआर औपचारिक रूप से दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की सत्यता, उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार तय की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री मोदी का संदेश राजनीतिक प्रतिक्रिया से अधिक सामाजिक दृष्टिकोण पर केंद्रित दिखाई दिया। जहां एक ओर उन्होंने अभद्र भाषा के प्रयोग को गलत बताया, वहीं दूसरी ओर युवाओं के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाते हुए उन्हें सुधार का अवसर देने की वकालत की। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है और कई लोग कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से यह संकेत देने का प्रयास किया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन संवाद की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं को केवल उनकी एक गलती के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के जरिए उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
प्रधानमंत्री के इस संदेश को राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि यह बयान युवाओं के प्रति कठोर कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल देता है। अब सबकी निगाहें दिल्ली पुलिस की जांच और उसके बाद होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं, जबकि प्रधानमंत्री ने अपने स्तर पर संवाद, संयम और सुधार का संदेश देकर विवाद को शांत करने की कोशिश की है।

