अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। गुरुवार को नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया और कहा कि बुजुर्ग परिवार, समाज और देश की अमूल्य धरोहर हैं। उनके पास जीवन का लंबा अनुभव, संघर्षों की सीख और सामाजिक मूल्यों की समृद्ध विरासत होती है। नई पीढ़ी को इन अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में परिवारों की संरचना और जीवनशैली में कई बदलाव आए हैं। ऐसे समय में वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान और उन्हें सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। बुजुर्गों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार और समाज को मजबूत बनाने में लगाया है। इसलिए उनके जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें सम्मान, अपनापन और सुरक्षा मिलना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और व्यवस्थाओं के माध्यम से उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां वे आत्मसम्मान और सुरक्षित माहौल में जीवन व्यतीत कर सकें। मुख्यमंत्री धामी ने वृद्धावस्था पेंशन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए यह योजना संचालित की जा रही है। अब पति-पत्नी दोनों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है। इससे बुजुर्ग दंपती को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा मिल रहा है और उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता वरिष्ठ नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। बुजुर्गों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं और भावनात्मक सहारे की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार स्तर पर व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की प्रगति का आकलन इस बात से भी किया जाना चाहिए कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जिन परिवारों में वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान होता है, वहां बच्चों और युवाओं को संस्कार, परंपरा और जीवन के व्यवहारिक अनुभव सहज रूप से मिलते हैं। बुजुर्ग परिवार की पिछली पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी हैं। उन्होंने नई पीढ़ी से बुजुर्गों के साथ संवाद बनाए रखने और उनके जीवन संघर्षों से सीख लेने का आह्वान किया। उनका कहना था कि आधुनिक जीवनशैली के बीच परिवार में बुजुर्गों की भूमिका को कम नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजनीतिक संदर्भ में राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां का अपमान किया। मुख्यमंत्री ने इसे उनके संस्कारों से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान की परंपरा रही है और सार्वजनिक जीवन में भी इस सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
वृद्धाश्रमों में रहने से लेकर देखभाल तक की व्यवस्था पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वरिष्ठ नागरिक, जिन्हें परिवार का पर्याप्त सहारा नहीं मिल पाता, उनके लिए राज्य में वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों में बुजुर्गों के रहने के साथ भोजन, देखभाल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। सरकार का प्रयास है कि किसी भी बुजुर्ग को अकेलेपन या असुरक्षा की स्थिति में जीवन न बिताना पड़े। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रमों को केवल रहने की जगह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इनका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और मानवीय वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे केंद्रों में रहने वाले बुजुर्गों की जरूरतों के अनुसार सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी सरकार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धजनों का सम्मान भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। हमारे परिवारों में बुजुर्गों को हमेशा अनुभव और ज्ञान का स्रोत माना गया है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक और आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन जीवन के व्यवहारिक अनुभव और संघर्षों से मिलने वाली सीख का कोई विकल्प नहीं है। बुजुर्गों का अनुभव युवाओं को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा दे सकता है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस केवल वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का दिन भी है। इस दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि परिवार और समाज में बुजुर्गों को वह सम्मान और स्थान मिले, जिसके वे हकदार हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। इसके लिए सरकार अपनी योजनाओं और व्यवस्थाओं के माध्यम से काम कर रही है, लेकिन सरकारी प्रयास तभी प्रभावी होंगे जब परिवार और समाज भी अपनी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके साथ समय बिताना, उनकी बात सुनना और उन्हें परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस कराना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का अनुभव समाज की अमूल्य पूंजी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आगे भी वरिष्ठ नागरिकों के हित में आवश्यक कदम उठाती रहेगी। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड के बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा के साथ सम्मानजनक जीवन, बेहतर देखभाल और सुरक्षित वातावरण मिल सके। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ कि वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। परिवार, समाज और सरकार के सामूहिक प्रयासों से ही ऐसा वातावरण बनाया जा सकता है, जहां बुजुर्ग अपने जीवन के इस पड़ाव को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जी सकें।

