पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव, सरकार ने जारी रखीं मौजूदा दरें

छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले करोड़ों निवेशकों के लिए सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), पोस्ट ऑफिस की सावधि जमा और सुकन्या समृद्धि योजना समेत सभी प्रमुख छोटी बचत योजनाओं पर मौजूदा ब्याज दरें ही लागू रहेंगी। यानी निवेशकों को इस तिमाही में न तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा और न ही किसी योजना की दर में कटौती की गई है। सरकार का यह फैसला उन लाखों-करोड़ों बचतकर्ताओं के लिए अहम है, जो बैंक एफडी के अलावा पोस्ट ऑफिस और सरकार समर्थित छोटी बचत योजनाओं में अपनी बचत लगाते हैं। इन योजनाओं में मिलने वाला ब्याज पहले से तय होता है और सरकार हर तीन महीने में इनकी दरों की समीक्षा करती है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए दरों में बदलाव नहीं किए जाने का मतलब है कि निवेशकों को पिछली तिमाही की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ पर इस समय 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। इसी तरह सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 प्रतिशत ब्याज की दर बरकरार रखी गई है। छोटी बचत योजनाओं में उपलब्ध ब्याज दरें अलग-अलग योजनाओं के आधार पर 4 प्रतिशत से लेकर 8.2 प्रतिशत तक हैं। सरकार की ओर से दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से इन योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को फिलहाल मौजूदा दरों पर ही बचत जारी रखनी होगी। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को लेकर सरकार का फैसला बाजार की परिस्थितियों से भी जुड़ा होता है। सरकार दरों की समीक्षा करते समय देश में नकदी की स्थिति, महंगाई और सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले प्रतिफल समेत विभिन्न आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखती है। यही वजह है कि इन योजनाओं की ब्याज दरों का हर तीन महीने में पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। हालांकि, समीक्षा का मतलब यह नहीं है कि हर तिमाही में ब्याज दरों में बदलाव किया ही जाए।

सरकार ने इससे पहले दिसंबर 2023 में छोटी बचत योजनाओं की कुछ ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से लगातार 11वीं तिमाही ऐसी है, जब इन योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लंबे समय से दरें स्थिर रहने के कारण निवेशकों के लिए मौजूदा ब्याज दरें ही उनकी बचत और निवेश की योजना बनाने का आधार बनी हुई हैं। पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना के अलावा छोटी बचत योजनाओं में वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और किसान विकास पत्र जैसी योजनाएं भी शामिल हैं। अलग-अलग योजनाओं की अवधि, ब्याज भुगतान का तरीका और कर संबंधी नियम अलग होते हैं। इसलिए निवेशकों के लिए केवल ब्याज दर देखना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि योजना की अवधि और उससे जुड़े नियमों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

छोटी बचत योजनाओं का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि ये घरेलू बचत के प्रमुख माध्यमों में शामिल हैं। देश में बड़ी संख्या में लोग अपनी आय का एक हिस्सा सुरक्षित निवेश के तौर पर इन योजनाओं में जमा करते हैं। इन योजनाओं में मिलने वाला रिटर्न सरकार द्वारा तय किया जाता है, जिससे निवेशकों को बाजार आधारित कई निवेश विकल्पों की तुलना में ब्याज दर की अधिक स्पष्ट जानकारी पहले से मिल जाती है। इन योजनाओं में जमा होने वाली रकम को नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड यानी राष्ट्रीय लघु बचत कोष में रखा जाता है। छोटी बचत योजनाओं से मिलने वाली रकम सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत होती है। यही वजह है कि इन योजनाओं की ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को आर्थिक परिस्थितियों और सरकारी प्रतिभूतियों की दरों से जोड़कर देखा जाता है।

छोटी बचत योजनाओं की तीन प्रमुख श्रेणियां और इनमें शामिल योजनाएं

छोटी बचत योजनाओं को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है। पहली श्रेणी पोस्टल डिपॉजिट की है। इसमें डाकघर बचत खाता, आवर्ती जमा, सावधि जमा और मासिक आय योजना जैसी योजनाएं आती हैं। इन योजनाओं का इस्तेमाल आमतौर पर नियमित बचत और निश्चित अवधि के लिए पैसा सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। दूसरी श्रेणी बचत प्रमाणपत्रों की है। इसमें राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और किसान विकास पत्र प्रमुख हैं। इन योजनाओं में निवेश की एक निर्धारित अवधि होती है और नियमों के अनुसार निवेश की गई राशि पर ब्याज मिलता है। किसान विकास पत्र की खासियत यह है कि इसमें निवेश की राशि निर्धारित अवधि में तय नियमों के अनुसार बढ़ती है।

तीसरी श्रेणी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी बचत योजनाओं की है। इसमें सुकन्या समृद्धि योजना, सार्वजनिक भविष्य निधि और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना शामिल हैं। सुकन्या समृद्धि योजना विशेष रूप से बेटियों के भविष्य के लिए बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। पीपीएफ लंबी अवधि की बचत और निवेश के लिए लोकप्रिय सरकारी योजना है, जबकि वरिष्ठ नागरिक बचत योजना बुजुर्ग निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर तय करने के लिए श्यामला गोपीनाथ समिति की ओर से सुझाए गए फॉर्मूले का भी उल्लेख किया जाता है। समिति की सिफारिश के अनुसार इन योजनाओं की ब्याज दरें समान अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल से करीब 0.25 प्रतिशत से 1 प्रतिशत अधिक रखी जानी चाहिए। हालांकि, वास्तविक ब्याज दर तय करने का अंतिम फैसला सरकार करती है।

इस तरह अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में छोटी बचत योजनाओं के निवेशकों को मौजूदा ब्याज दरों के साथ ही आगे बढ़ना होगा। पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 प्रतिशत ब्याज की दर बरकरार रहने से इन योजनाओं में पहले से निवेश कर रहे लोगों के रिटर्न पर तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं, नए निवेशकों के लिए भी इस तिमाही में यही ब्याज दरें लागू रहेंगी। सरकार की अगली समीक्षा में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर दरों में बदलाव का फैसला किया जा सकता है। 

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