डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूपीआई लेनदेन से जुड़े नए शुल्क को लागू करने की तारीख आगे बढ़ सकती है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के प्रस्ताव को फिलहाल टालने पर विचार किया जा रहा है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कारोबारियों को त्योहारी सीजन के दौरान अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है और नया नियम 15 अक्टूबर 2026 के बजाय 1 जनवरी 2027 से लागू हो सकता है। इस संबंध में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को एनपीसीआई की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में शुल्क लागू करने की समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा और इसके बाद अंतिम स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े कारोबारियों की नजर बैठक के फैसले पर टिकी है।
अक्टूबर से दिसंबर तक का समय खुदरा बाजार, खरीदारी, कारोबार और ऑनलाइन भुगतान के लिहाज से अहम माना जाता है। ऐसे में शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला कारोबारियों को अपनी भुगतान व्यवस्था और लागत की योजना बनाने के लिए अतिरिक्त समय दे सकता है। हालांकि, जब तक एनपीसीआई की ओर से औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की जाती, तब तक इसे संभावित बदलाव ही माना जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका सीधा अर्थ आम ग्राहकों से यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त पैसा वसूलना नहीं है। प्रस्तावित एमडीआर चुनिंदा व्यापारियों से जुड़े कुछ लेनदेन पर लागू होना है। इसलिए सामान्य ग्राहक यदि किसी दुकान, प्रतिष्ठान या अन्य व्यापारी को यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं, तो उन्हें इस वजह से अलग से शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी। ग्राहक के लिए यूपीआई भुगतान की मौजूदा सुविधा पर सीधे कोई नया शुल्क लगाने की घोषणा इस प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है।
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से भुगतान सेवा से जुड़े प्रावधानों के तहत लिया जा सकता है। इसकी दर और लागू होने की शर्तें इस बात पर निर्भर करती हैं कि लेनदेन किस श्रेणी में आता है और संबंधित व्यवस्था में कौन-से नियम तय किए गए हैं। इस मामले में प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत की दर सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू नहीं होगी, बल्कि इसे चुनिंदा व्यापारी लेनदेन तक सीमित रखने की बात कही गई है।
प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की थी तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर 2026 तय की गई थी। अब इस समयसीमा को आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि एनपीसीआई की स्टीयरिंग कमेटी इस बदलाव पर सहमति देती है, तो व्यापारियों को नए शुल्क की व्यवस्था अपनाने के लिए लगभग ढाई महीने का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। हालांकि, तारीख बढ़ाने का प्रस्ताव अपने आप में अंतिम निर्णय नहीं है। 9 अक्टूबर को होने वाली बैठक में इस विषय पर विचार के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पहले से निर्धारित तारीख में बदलाव किया जाएगा या नहीं। यदि समयसीमा आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनती है, तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ही संबंधित नियम लागू करने की योजना बनी रह सकती है।
व्यापारियों के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि डिजिटल भुगतान अब छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक कारोबार का सामान्य हिस्सा बन चुका है। ग्राहक नकदी के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद कर रहे हैं। किराना दुकानों, रेस्तरां, खुदरा प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवाओं से जुड़े कारोबार में यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। ऐसे में भुगतान स्वीकार करने की लागत में होने वाला कोई भी बदलाव कारोबारियों की वित्तीय योजना को प्रभावित कर सकता है। यदि शुल्क लागू करने की तारीख जनवरी तक बढ़ती है, तो व्यापारियों को त्योहारी खरीदारी और साल के अंत में होने वाले कारोबार के दौरान मौजूदा भुगतान व्यवस्था के साथ काम जारी रखने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, उन्हें नए नियमों की शर्तों को समझने, अपने भुगतान सेवा प्रदाताओं से जानकारी लेने और जरूरत के अनुसार हिसाब-किताब की व्यवस्था तैयार करने के लिए अधिक समय मिलेगा।
दूसरी ओर, यदि तय कार्यक्रम के अनुसार 15 अक्टूबर से ही व्यवस्था लागू होती है, तो संबंधित श्रेणियों में आने वाले व्यापारियों को नियमों के अनुरूप तैयारी करनी होगी। ऐसे में कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि उनका भुगतान किस श्रेणी में आता है और प्रस्तावित शुल्क किन परिस्थितियों में लागू होगा। केवल 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लगेगा। यूपीआई व्यवस्था का विस्तार देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रहा है। इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण भुगतान की सरल प्रक्रिया और ग्राहकों के लिए सहज अनुभव है।
ऐसे में किसी भी नए शुल्क से जुड़े फैसले में व्यापारियों की लागत, भुगतान सेवा से जुड़ी व्यवस्थाओं और ग्राहकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एनपीसीआई नए शुल्क की समयसीमा बढ़ाने पर मुहर लगाती है या नहीं। 9 अक्टूबर की बैठक के बाद इस प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। तब तक 1 जनवरी 2027 की तारीख को संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आम ग्राहकों के लिए फिलहाल मुख्य बात यही है कि प्रस्तावित एमडीआर को सभी यूपीआई भुगतानों पर लगने वाले अतिरिक्त ग्राहक शुल्क के रूप में नहीं समझा जाए। अंतिम नियमों और उनके दायरे की पुष्टि एनपीसीआई की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।

