राजधानी देहरादून के पर्यटन मानचित्र पर जुड़े दो नए केंद्र, पर्यटकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लिए यह सप्ताह पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाओं के लिहाज से खास रहा। एक ओर देहरादून से करीब 45 किलोमीटर दूर हरिपुर कालसी में यमुना के तट को नए स्वरूप में विकसित करते हुए 7.52 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हरिघाट श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समर्पित किया गया, तो दूसरी ओर राजधानी के मियांवाला क्षेत्र में वर्षों पुराने तालाब को नया जीवन देकर 8.64 करोड़ की लागत से जल सृष्टि पार्क विकसित किया गया। दोनों परियोजनाएं अपने स्वरूप में अलग हैं, लेकिन इनके पीछे एक समान तस्वीर दिखाई देती है, उत्तराखंड में ऐसे नए पर्यटन और सार्वजनिक स्थल तैयार करना, जहां आस्था, प्रकृति, मनोरंजन और आधुनिक सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों। हरिपुर कालसी में यमुना तट धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है, जबकि मियांवाला का जल सृष्टि पार्क राजधानी के लोगों के लिए प्रकृति और मनोरंजन से जुड़ा नया ठिकाना बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर के अवसर पर हरिपुर कालसी में आयोजित कार्यक्रम ने यमुना तट को अलग पहचान दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7.52 करोड़ रुपये की लागत से मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित नए स्नान घाट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया और मुख्यमंत्री ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों के साथ यमुना की आरती में हिस्सा लिया। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत यमुना तट पर 2100 दीप जलाए गए, जिससे पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठा। 

इसके साथ ही मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया गया। हरिपुर कालसी में विकसित किया गया नया घाट करीब 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। यहां श्रद्धालुओं के लिए स्नान की सुविधा के साथ चेंजिंग रूम, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था, नदी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां और आरती के लिए अलग स्थल तैयार किए गए हैं। घाट के निर्माण के साथ यमुना तट के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया गया है। अब तक यहां होने वाली यमुना आरती साप्ताहिक स्तर पर आयोजित होती थी, लेकिन नए विकास कार्यों के बाद इसे प्रतिदिन आयोजित किए जाने की दिशा में व्यवस्था की गई है। इससे धार्मिक गतिविधियों के साथ क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। यही नहीं, इसके ठीक बाद राजधानी के मियांवाला में विकसित जल सृष्टि पार्क ने देहरादून के भीतर ही पर्यटन और मनोरंजन का एक नया विकल्प खड़ा कर दिया है। पुराने तालाब को समाप्त करने के बजाय उसका पुनर्जीवन कर तैयार किया गया यह पार्क आधुनिक सुविधाओं और प्राकृतिक वातावरण का मेल है। तालाब के बीच बनाया गया आइलैंड और वहां तक पेडल बोटिंग के जरिए पहुंचने की सुविधा इसे सामान्य पार्कों से अलग बनाती है। इस तरह महज दो दिनों के अंतराल में देहरादून जिले में पर्यटन के दो अलग-अलग स्वरूप सामने आए। 

हरिपुर कालसी में यमुना की धारा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ नया पर्यटन केंद्र तैयार हुआ, तो मियांवाला में पुराने जल स्रोत को संरक्षित कर शहरी आबादी के बीच प्रकृति और मनोरंजन का नया स्थल विकसित किया गया। दोनों परियोजनाएं यह भी बताती हैं कि पर्यटन का मतलब केवल बड़े पर्यटन स्थलों या दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। शहर के आसपास मौजूद प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को सुविधाओं से जोड़कर भी नए पर्यटन केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। राजधानी के लिहाज से यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देहरादून आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए अब मुख्य शहर से अपेक्षाकृत कम दूरी पर दो नए आकर्षण जुड़ गए हैं। हरिपुर कालसी की अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान है। यह जौनसार-भाबर क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश क्षेत्र माना जाता है और इसके आसपास कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं। ऐसे में विकसित हरिघाट, मां यमुना की प्रतिमा और प्रतिदिन आरती की व्यवस्था क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत कर सकती है। दूसरी ओर मियांवाला का जल सृष्टि पार्क शहर के तेजी से विस्तार के बीच खुले और हरित स्थान की जरूरत को पूरा करने की कोशिश है। यहां सुबह की सैर से लेकर योग, बच्चों के मनोरंजन, फूलों और वनस्पतियों की जानकारी, बैठने और पेडल बोटिंग जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई गई हैं। दोनों परियोजनाओं की खासियत यह भी है कि इनमें पहले से मौजूद संसाधनों और स्थलों को नई सुविधाओं के साथ जोड़ा गया है। हरिपुर कालसी में यमुना तट को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाकर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई गईं, जबकि मियांवाला में पुराने तालाब को बचाकर उसके आसपास पार्क विकसित किया गया। 

यानी एक तरफ नदी और आस्था को केंद्र में रखकर धार्मिक पर्यटन का आधार मजबूत किया गया, वहीं दूसरी ओर पुराने जल स्रोत को संरक्षित करते हुए पर्यावरण अनुकूल शहरी पर्यटन का मॉडल तैयार किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने मियांवाला में कहा कि विकास का अर्थ केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करना नहीं, बल्कि ऐसा विकास करना है जिससे लोगों का जीवन आसान हो, शहर सुंदर बने और पर्यावरण सुरक्षित रहे। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और विरासत से जोड़ते हुए लोगों से पार्क को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने में सहयोग की अपील भी की। इस लिहाज से देखा जाए तो देहरादून के लिए यह सप्ताह केवल दो परियोजनाओं के लोकार्पण का सप्ताह नहीं रहा, बल्कि राजधानी के आसपास पर्यटन की नई संभावनाओं को सामने लाने वाला भी रहा। एक छोर पर यमुना का धार्मिक तट और दूसरे छोर पर शहर के भीतर विकसित जल सृष्टि पार्क दोनों मिलकर देहरादून की पर्यटन तस्वीर को नया विस्तार देते दिखाई देते हैं।

हरिपुर कालसी में सीएम धामी ने 7.52 करोड़ की लागत से विकसित “हरिघाट” का किया लोकार्पण

हरिपुर कालसी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7.52 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हरिघाट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण किया गया और यमुना तट पर 2100 दीप जलाकर आरती की गई। साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण से भर दिया। मुख्यमंत्री ने मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया। एमडीडीए द्वारा विकसित यह स्नान घाट 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। घाट पर श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था, सीढ़ियां और आरती स्थल विकसित किए गए हैं। यमुना तट के सौंदर्यीकरण के साथ नदी के किनारे सुरक्षा दीवार और प्लेटफॉर्म भी बनाए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यहां होने वाली यमुना आरती को लेकर है। नए घाट के विकास के बाद अब यहां साप्ताहिक के बजाय प्रतिदिन यमुना आरती आयोजित करने की व्यवस्था की जा रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हरिपुर कालसी पहले से ही ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला क्षेत्र है। ऐसे में यमुना तट का यह नया स्वरूप इस क्षेत्र को देहरादून जिले के एक नए पर्यटन पड़ाव के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।

राजधानी देहरादून में पर्यटन और मनोरंजन का नया विकल्प बना “जल सृष्टि पार्क”—

मियांवाला में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित जल सृष्टि पार्क ने राजधानी में पर्यटन और मनोरंजन का नया विकल्प दिया है। एमडीडीए ने मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत पुराने तालाब को नया जीवन देकर इस पार्क को विकसित किया है। पार्क की सबसे खास बात तालाब के बीच बनाया गया आइलैंड और पेडल बोटिंग की सुविधा है। इससे यहां आने वाले लोगों को पानी, हरियाली और खुले वातावरण के बीच समय बिताने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री धामी ने इसे देहरादून में ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ वाला स्थान बताया। पार्क में सुबह-शाम भ्रमण के लिए जॉगिंग ट्रैक, योग के लिए योगा डेक, बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क, शैक्षिक पुष्प उद्यान, हरित क्षेत्र, बैठने की सुविधाएं और आकर्षक लैंडस्केपिंग की गई है। इस तरह इसे केवल घूमने के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, मनोरंजन, पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ाव वाले बहुआयामी स्थल के रूप में विकसित किया गया है।

कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, महापौर सौरभ थपलियाल, एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी सहित वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पार्क बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसकी स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखना समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। 

उन्होंने बच्चों और युवाओं से पार्क का उपयोग करने के साथ जलाशय और हरित क्षेत्र की देखभाल में सहयोग करने की अपील की। बता दें कि मियांवाला में विकसित यह पार्क तेजी से फैलते देहरादून में सार्वजनिक हरित स्थलों की जरूरत को भी पूरा करता है। खास बात यह है कि इसके लिए नए जल स्रोत को तैयार करने के बजाय पुराने तालाब को ही संरक्षित कर उसके आसपास सुविधाएं विकसित की गईं। इस वजह से यह परियोजना जल संरक्षण और शहरी विकास को एक साथ जोड़ने का उदाहरण बनकर सामने आई है। कुल मिलाकर हरिपुर कालसी का हरिघाट और मियांवाला का जल सृष्टि पार्क देहरादून जिले में पर्यटन के दो अलग-अलग रंग सामने लाते हैं, एक में यमुना की आस्था और धार्मिक पर्यटन है, तो दूसरे में जल, हरियाली, मनोरंजन और परिवार के साथ समय बिताने का नया विकल्प है। 

सीएम धामी ने कहा- जल सृष्टि पार्क में मिलेगी “नैनीताल जैसी फीलिंग”–

मियांवाला में विकसित किया गया जल सृष्टि पार्क रायपुर क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ देहरादूनवासियों के लिए भी मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का नया ठिकाना बनकर सामने आया है। करीब 8.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस पार्क की सबसे खास बात यहां मौजूद पुराने तालाब का पुनर्जीवन है। तालाब को संरक्षित करते हुए उसके बीच में सुंदर आइलैंड विकसित किया गया है। यहां पेडल बोटिंग की सुविधा भी शुरू की गई है, जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पार्क के लोकार्पण के दौरान कहा कि यहां आने वाले लोगों को देहरादून में ही ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ मिलेगी। पार्क में जॉगिंग ट्रैक, योगा डेक, बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क, एजुकेशनल फ्लावर गार्डन, हरित क्षेत्र और बैठने की सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने जल स्रोत को संरक्षित कर उसके आसपास आधुनिक सुविधाएं विकसित करना पर्यावरण और विकास के संतुलन का उदाहरण है। उन्होंने लोगों से पार्क को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इसे अपना पार्क समझकर इसकी देखभाल करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

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