दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया। सुबह 8.51 बजे बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में आग भड़की थी। जब वहां का कांच फोड़ा गया तो बेसमेंट की तरफ आग फेल गई। यहां फ्लोरिस स्टे होटल संचालित होता था। लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट और उससे जुड़े होटल परिसर में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया और वे धुएं तथा लपटों के बीच फंस गए।
राहत एवं बचाव दलों ने घंटों तक अभियान चलाकर दर्जनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। दिल्ली अग्निशमन सेवा को सुबह आग लगने की सूचना मिलने के बाद तत्काल दमकल की कई गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के साथ-साथ भवन में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार करीब 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई घायलों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। बचावकर्मियों को सबसे अधिक परेशानी भवन के बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने में हुई, क्योंकि पूरा परिसर धुएं से भर चुका था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई और कुछ ही समय में पूरे भवन में फैल गई।
रेस्टोरेंट, होटल और बेसमेंट में बने कमरों तक धुआं पहुंचने के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए। स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती दौर में बचाव कार्य में मदद की और कई लोगों को खिड़कियों तथा बालकनियों के रास्ते बाहर निकाला गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भवन में होटल और रेस्टोरेंट दोनों का संचालन किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में भी लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। आग फैलने के बाद सबसे अधिक प्रभावित यही हिस्सा रहा। अधिकारियों को आशंका है कि अधिकांश मौतें दम घुटने और जहरीले धुएं के कारण हुई हैं।
हालांकि मौतों के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। हादसे के बाद एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मृतकों में कुछ विदेशी नागरिकों के भी शामिल होने की आशंका जताई गई है। शुरुआती रिपोर्टों में विदेशी नागरिकों के हताहत होने की बात सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक सभी मृतकों की आधिकारिक पहचान जारी नहीं की है। मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है तथा संबंधित दूतावासों से भी संपर्क किया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दक्षिण दिल्ली के अधिकारियों ने पूरे इलाके को घेरकर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका। इसके बाद भी तलाशी अभियान जारी रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भवन में कोई व्यक्ति फंसा न रह गया हो।
अवैध होटल संचालन और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच के आदेश
हादसे के बाद भवन के संचालन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि भवन में होटल और रेस्टोरेंट का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। उप मंडल दंडाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि इमारत के निचले हिस्से में होटल अथवा रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा था और इसके लाइसेंस तथा स्वीकृतियों की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह भी आशंका है कि भवन का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य से अलग तरीके से किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरण मौजूद थे या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आपातकालीन निकास, धुआं निकासी प्रणाली और अग्निशमन मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। आग की भयावहता को देखते हुए बिजली आपूर्ति भी तत्काल बंद कर दी गई थी ताकि लपटों को और अधिक फैलने से रोका जा सके। दमकल कर्मियों ने लगातार कई घंटों तक अभियान चलाकर आग को पूरी तरह नियंत्रित किया। फिलहाल घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी जांच में जुटे हुए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और हादसे की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी अधिकारियों से बातचीत कर राहत कार्यों की निगरानी की तथा विस्तृत जांच सुनिश्चित करने को कहा है। मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय ने भी घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि फिलहाल प्राथमिकता घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों की सहायता है।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर राजधानी में व्यावसायिक भवनों और होटलों में अग्नि सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा गया है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में कई बड़े अग्निकांड सामने आ चुके हैं, जिनमें सुरक्षा नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण के रूप में सामने आई थी। ऐसे में मालवीय नगर अग्निकांड की जांच रिपोर्ट पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल इस त्रासदी की असली वजह बताएगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।

