संसद का मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हो गया। सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नीट परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा। इसी राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही संसद परिसर में राजनीतिक माहौल गरमा गया था। विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्र होकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया है और सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर सरकार का कहना था कि संसद के कामकाज को बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
लोकसभा में दिन की शुरुआत एक विशेष और भावनात्मक माहौल के साथ हुई। स्पीकर ओम बिरला ने सभी सांसदों से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने का आग्रह किया। इसके बाद पूरे सदन में वंदे मातरम् का पूर्ण गायन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत सत्ता और विपक्ष के सभी प्रमुख नेता मौजूद रहे। राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के बाद सदन में कुछ क्षणों तक गंभीर और गरिमामय वातावरण बना रहा। हालांकि यह माहौल ज्यादा देर तक नहीं रहा। वंदे मातरम् के समापन के तुरंत बाद स्पीकर ओम बिरला ने घोषणा की कि लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जाती है। इसके साथ ही करीब तीन सप्ताह तक चले मानसून सत्र का समापन हो गया।
21 जुलाई से शुरू हुए इस मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में कई बार कामकाज बाधित हुआ। विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा। सबसे प्रमुख मुद्दा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई रहा। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ पुलिस ने सख्ती बरती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से इस पूरे मामले पर सदन में बयान देने की मांग भी की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का कहना था कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इन मांगों को लेकर संसद के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
सत्र के दौरान हंगामे के बावजूद संसद ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी। बुधवार को संसद ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने संबंधी विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) संशोधन विधेयक को मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई अन्य विधेयक भी पारित किए गए। संसद के इस सत्र में कुल 19 विधेयकों को मंजूरी मिली। हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि इनमें से कई विधेयक पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किए गए। विपक्षी दलों का दावा है कि सात विधेयक मात्र 36 मिनट के भीतर पारित कर दिए गए, जिससे व्यापक चर्चा की संसदीय परंपरा प्रभावित हुई।
शुद्धिकरण विवाद पर राज्यसभा में हुई तीखी बहस
मानसून सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में उत्तराखंड से जुड़ा एक मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर सदन में हंगामा देखने को मिला।
राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों का हाथ है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं। खरगे के आरोपों के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कई विपक्षी सांसदों ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आरोपों को निराधार बताया।
विवाद बढ़ने पर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा किए गए ऐसे कार्यों का समर्थन नहीं करती है। नड्डा ने सदन को आश्वस्त किया कि इस मामले की जानकारी जुटाई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम के पीछे कौन लोग थे। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं और सभी राजनीतिक दलों के सम्मान में विश्वास रखती है। यदि किसी ने पार्टी के नाम का उपयोग करते हुए अनुचित गतिविधि की है तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला। नीट आंदोलन, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, जंतर-मंतर विवाद, अयोध्या राम मंदिर चंदा मामला और हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद जैसे विषय लगातार चर्चा के केंद्र में रहे। इसके बावजूद संसद ने कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए। अब राजनीतिक दलों की नजर आगामी सत्र और आने वाले चुनावी अभियानों पर होगी, जहां इन मुद्दों की गूंज संसद से निकलकर जनता के बीच भी सुनाई देने की संभावना है।

