अगर आप 30 जुलाई से 12 अगस्त 2026 के बीच दिल्ली, हरिद्वार या देहरादून की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले अपनी यात्रा की पूरी तैयारी कर लें। खासतौर पर रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह अवधि सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। कांवड़ यात्रा के दौरान लागू होने वाले विशेष ट्रैफिक प्लान और डायवर्जन व्यवस्था का सीधा असर बस संचालन, यात्रा अवधि और किराए पर पड़ने वाला है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस द्वारा तैयार की गई योजना के तहत कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा, जिसके चलते बसों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ेगा।
रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक, डायवर्जन लागू होने के बाद दिल्ली और देहरादून जाने वाली बसों को 50 से 80 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। इस अतिरिक्त सफर से बसों का परिचालन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर यात्रियों की जेब पर भी दिखाई देगा। विभाग के स्तर पर प्रति यात्री करीब 80 से 100 रुपए तक किराया बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।
सिर्फ किराया ही नहीं, बल्कि यात्रा का समय भी बढ़ जाएगा। सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में करीब डेढ़ से दो घंटे अतिरिक्त लग सकते हैं। ऐसे में जो यात्री किसी जरूरी काम, नौकरी, परीक्षा, अस्पताल या अन्य निर्धारित कार्यक्रम के लिए यात्रा करने वाले हैं, उन्हें समय का विशेष ध्यान रखना होगा। कांवड़ यात्रा के दौरान हर साल उत्तर भारत के कई राज्यों में लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर भारी भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन विशेष ट्रैफिक प्लान लागू करता है, जिससे सामान्य वाहनों के रूट में बदलाव करना पड़ता है।
इस बार भी हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो से संचालित होने वाली कई बसें इस व्यवस्था से प्रभावित रहेंगी। दोनों डिपो से प्रतिदिन दिल्ली और देहरादून के लिए कुल 64 बसों का संचालन होता है। इनमें काठगोदाम डिपो से दिल्ली के लिए 26 और देहरादून के लिए 6 बसें संचालित होती हैं, जबकि हल्द्वानी डिपो से दिल्ली के लिए 24 और देहरादून के लिए 8 बसें रोजाना चलती हैं। ट्रैफिक डायवर्जन लागू होने के बाद इन सभी बसों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से ही चलाया जाएगा। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त दूरी तय करने से ईंधन की खपत बढ़ेगी, बसों की परिचालन लागत में वृद्धि होगी और एक ही बस के एक दिन में पूरे होने वाले चक्कर भी कम हो सकते हैं। यही वजह है कि किराए में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है ताकि अतिरिक्त खर्च की भरपाई की जा सके। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय ट्रैफिक प्लान लागू होने और वास्तविक परिस्थितियों की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले बसों के समय, रूट और संभावित देरी की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। यदि किसी को निश्चित समय पर गंतव्य तक पहुंचना है, तो अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना अधिक उचित रहेगा।
डायवर्जन से बदलेगा पूरा ट्रैवल प्लान, एक्सप्रेस-वे पर भी रहेगा प्रतिबंध
प्रारंभिक ट्रैफिक योजना के अनुसार दिल्ली जाने वाली रोडवेज बसों को हापुड़ और बुलंदशहर के रास्ते भेजा जाएगा, जबकि हरिद्वार और देहरादून जाने वाली बसों का संचालन मुजफ्फरनगर और बिजनौर मार्ग से किया जाएगा। हालांकि अंतिम रूट चार्ट ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए जाने के बाद ही पूरी तरह लागू होगा। इसके बावजूद यात्रियों को पहले से ही संभावित बदलाव के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। उधर, देहरादून शहर को कांवड़ यात्रा के दौरान जाम से बचाने के लिए पुलिस ने अलग रणनीति बनाई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे और दून-पांवटा हाईवे से कांवड़ वाहनों का प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर के भीतर अनावश्यक ट्रैफिक दबाव न बढ़े और स्थानीय लोगों के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
योजना के तहत दिल्ली की ओर से आने वाले कांवड़ वाहनों को दिल्ली सीमा पर ही एक्सप्रेस-वे में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसी तरह पांवटा साहिब की ओर से आने वाले वाहनों को हिमाचल प्रदेश की सीमा से ही सहारनपुर मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा। वहां से ये वाहन हरिद्वार की ओर जाएंगे और देहरादून शहर में प्रवेश नहीं करेंगे। इससे शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार और देहरादून क्षेत्र में लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण सड़कें पहले से ही व्यस्त रहती हैं। यदि सामान्य यातायात और कांवड़ यात्रा दोनों एक ही मार्ग से संचालित किए जाएं, तो लंबे जाम, दुर्घटनाओं और आपातकालीन सेवाओं में बाधा जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इसी कारण कांवड़ वाहनों और सामान्य यातायात के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए जा रहे हैं। ऐसे अवसरों पर ट्रैफिक डायवर्जन अस्थायी असुविधा जरूर पैदा करता है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। इसलिए यदि आप 30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच दिल्ली, हरिद्वार या देहरादून की यात्रा करने वाले हैं, तो अपने सफर की योजना पहले से बनाएं, संभावित रूट बदलाव की जानकारी लेते रहें और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा शुरू करें। इससे न केवल आपकी यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी, बल्कि अनावश्यक परेशानी और देरी से भी बचा जा सकेगा।

