शिमला-किन्नौर नेशनल हाईवे खुला, भारी भूस्खलन से ठप रही आवाजाही, वाहन सवारों को मिली राहत

हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर कहर बरपा रहा है। लगातार हो रही बारिश के बीच शिमला को किन्नौर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-5 सोमवार को लगभग 11 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा। रामपुर उपमंडल के डेड ज्यूरी क्षेत्र में देर रात हुए भारी भूस्खलन ने हाईवे को मलबे और विशाल चट्टानों से पूरी तरह पाट दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हाईवे बंद होने से न केवल किन्नौर जिले का राजधानी शिमला से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया, बल्कि सैकड़ों यात्रियों को पूरी रात सड़क पर ही बितानी पड़ी। कई लोग अपने परिवार और छोटे बच्चों के साथ वाहनों में फंसे रहे, जबकि आवश्यक कार्यों से यात्रा कर रहे लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रात के अंधेरे और लगातार गिरते पत्थरों के कारण तत्काल राहत कार्य शुरू करना संभव नहीं हो पाया। 

सुबह होते ही लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों ने मशीनरी और कर्मचारियों को मौके पर भेजा। हालांकि राहत कार्य आसान नहीं था, क्योंकि पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरता रहा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मशीन ऑपरेटरों और कर्मचारियों को बेहद सावधानी से काम करना पड़ा। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सड़क से मलबा हटाया गया और करीब 11 घंटे बाद हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया गया। हाईवे खुलने के बाद दोनों ओर फंसे वाहनों को धीरे-धीरे निकाला गया और यातायात सामान्य होना शुरू हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिशासी अभियंता के.एल. सुमन ने बताया कि सड़क को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया गया है और फिलहाल यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लगातार हो रही बारिश को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में कभी भी भूस्खलन की स्थिति दोबारा बन सकती है। 

डेड ज्यूरी क्षेत्र लंबे समय से भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। मानसून के दौरान यहां अक्सर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इस बार भी लगातार हुई बारिश के कारण पहाड़ी की मिट्टी कमजोर पड़ गई, जिससे देर रात अचानक भारी भूस्खलन हुआ और राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। हाईवे बंद होने का असर केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किन्नौर और शिमला के बीच आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन पर भी पड़ा। किन्नौर जाने और वहां से लौटने वाले पर्यटक भी कई घंटों तक जाम में फंसे रहे। कई यात्रियों ने पूरी रात अपनी गाड़ियों में ही गुजारी, जबकि कुछ लोगों को भोजन और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था और सड़क खुलते ही यातायात को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया।

मंगलवार से और तेज होगा बारिश का दौर, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

इस बीच मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी दिनों को लेकर भी गंभीर चेतावनी जारी की है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 106.4 मिलीमीटर वर्षा सोलन जिले के कंडाघाट में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बिलासपुर के काहू में 40.2 मिलीमीटर, जोगेंद्रनगर में 31 मिलीमीटर और राजधानी शिमला में 16.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सोमवार सुबह भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्के बादल छाए रहे और मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि मंगलवार से पश्चिमी विक्षोभ अधिक सक्रिय हो जाएगा, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने 28 जुलाई से 31 जुलाई तक राज्य के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 

विभाग के अनुसार इस अवधि के दौरान कई जिलों में तेज बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़कें अवरुद्ध होने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों, खड्डों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास जाने से परहेज करें। निचले और मैदानी इलाकों में फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ का भी खतरा जताया गया है। जिला प्रशासनों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। 

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान लगातार हो रही बारिश के कारण पहले भी कई सड़कें बंद हो चुकी हैं और अनेक स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में मौसम विभाग की ताजा चेतावनी को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वर्षा से पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। आने वाले कुछ दिन हिमाचल प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं, इसलिए सतर्कता और सावधानी ही किसी भी संभावित खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय होगी।

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