हिमाचल प्रदेश के कई जिले बारिश से अस्त-व्यस्त हैं। लगातार बारिश के बाद लोगों का जनजीवन भी प्रभावित हो गया है। इसके साथ 100 से अधिक संपर्क मार्ग भी भूस्खलन की वजह से बंद हैं । अब चंबा में बारिश से भारी नुकसान हुआ है। चंबा जिले में सोमवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने ऐसा तांडव मचाया कि कई इलाकों में लोगों की रात दहशत और बेबसी के बीच गुजरी। पहाड़ों से उतरते मलबे, उफनते नालों और तेज बहाव वाले पानी ने सुल्तानपुर वार्ड सहित आसपास की ग्राम पंचायतों में भारी तबाही मचा दी। देखते ही देखते सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं, घरों और दुकानों में पानी व मलबा घुस गया और लोगों की वर्षों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई। हालात इतने भयावह थे कि कई परिवारों को रात के अंधेरे में अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। सबसे ज्यादा असर ग्राम पंचायत सरोल, परेल और तड़ोली क्षेत्रों में देखने को मिला। लगातार हुई तेज बारिश के कारण पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गया, जिसने रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। कई घरों के आंगन और कमरों तक मलबा पहुंच गया, जबकि दुकानों में पानी भरने से लाखों रुपये का सामान खराब हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही मिनटों में पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
परेल क्षेत्र में हालात सबसे अधिक चिंताजनक बने रहे। यहां स्थित पुल के ऊपर जलभराव होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। पुल पर कई फीट तक पानी जमा हो गया, जिससे लोगों की आवाजाही बंद हो गई। वहीं पहाड़ी से लगातार आ रहे मलबे ने चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग को परेल के पास पूरी तरह ठप कर दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ओर से मार्ग बहाल करने के प्रयास शुरू किए गए, लेकिन भारी मलबे के कारण काम में कठिनाई आती रही।
बारिश के दौरान ओबडी क्षेत्र में एक बड़ा हादसा टल गया। देर रात पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरक गया और भारी-भरकम पत्थर तथा मलबा सीधे एक रिहायशी मकान पर आ गिरा। पत्थरों के गिरने की तेज आवाज सुनकर घर के अंदर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए घर से बाहर भागे। कुछ ही क्षणों में मकान का हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया। यदि लोग समय रहते बाहर नहीं निकलते तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है और लोग पूरी रात जागकर हालात पर नजर बनाए रहे।
सरोल और इसके अंतर्गत आने वाले घोलटी क्षेत्र में भी भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। यहां अचानक आए मलबे ने सड़क किनारे खड़े करीब 15 छोटे-बड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई वाहन पूरी तरह मलबे में दब गए जबकि कुछ को गंभीर नुकसान पहुंचा है। वाहन मालिकों का कहना है कि उनकी गाड़ियां कुछ ही मिनटों में मलबे के नीचे गायब हो गईं और वे कुछ नहीं कर सके। प्रभावित लोग अब प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
सुल्तानपुर क्षेत्र में भी हालात बेहद खराब रहे। कॉलेज के समीप स्थित दुकानों और मकानों में भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया। दुकानदारों को रातभर अपने प्रतिष्ठानों से मलबा और पानी निकालने के लिए संघर्ष करना पड़ा। कई दुकानों में रखा खाद्यान्न, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य सामग्री खराब हो गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण नुकसान का दायरा और बढ़ गया।
चेतावनी के बावजूद नहीं हुए इंतजाम, लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
इस पूरी आपदा ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही संभावित खतरों को लेकर क्षेत्र में लगातार चिंता जताई जा रही थी। स्थानीय लोगों और विभिन्न माध्यमों से प्रशासन को यह बताया गया था कि सुल्तानपुर और आसपास के इलाके बारिश के दौरान अत्यधिक संवेदनशील हैं तथा यहां मलबा आने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपायों को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर वर्ष बरसात के दौरान ऐसे हालात पैदा होते हैं, लेकिन प्रशासन केवल कागजी तैयारियों तक सीमित रहता है। जब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं हो जाता, तब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते। लोगों का कहना है कि यदि पहले से नालों की सफाई कराई जाती और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा दीवारों तथा जल निकासी की बेहतर व्यवस्था की जाती तो नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता था।
बारिश के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को अपने स्तर पर राहत और बचाव का काम करना पड़ा। कई परिवार सुबह तक घरों से मलबा निकालने में जुटे रहे। दुकानदार भी खराब हुए सामान को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए। वहीं मलबे में दबे वाहनों को निकालने के लिए स्थानीय लोग प्रशासन की मदद का इंतजार करते रहे। राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत, नुकसान का सर्वेक्षण और उचित मुआवजे की मांग की है। साथ ही चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने तथा मलबे में दबे वाहनों को सुरक्षित निकालने की अपील की है। लोगों का कहना है कि यदि अब भी स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में भी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की है। चंबा की यह तबाही केवल एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं, बल्कि समय रहते चेतावनियों पर ध्यान न देने की कीमत भी है, जिसे आज आम जनता अपने नुकसान और दर्द के रूप में भुगत रही है।

